Budget for environment:विश्वभर में बजट न केवल आर्थिक योजनाओं का खाका होता है, बल्कि यह हमारे पर्यावरण की दिशा भी तय करता है। हमारे देश में बजट के दौरान जो योजनाएँ और नीतियाँ बनाई जाती हैं, वे आर्थिक विकास के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इस ब्लॉग में हम विस्तार से चर्चा करेंगे कि कैसे एक संतुलित बजट नीतियाँ पर्यावरण के संरक्षण और विकास दोनों में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।
हरित कर (Green Taxes)
हरित कर, या ग्रीन टैक्स, उन उद्योगों और व्यवसायों पर लगाया जाता है जो बड़े पैमाने पर पर्यावरण प्रदूषण फैलाते हैं। इस कर से मिलने वाली राशि का उपयोग पर्यावरणीय परियोजनाओं और स्थायी विकास के लिए किया जा सकता है।
स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy):
बजट में स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों जैसे सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और जल विद्युत के विकास के लिए विशेष प्रावधान होना चाहिए। इन स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों का उपयोग करके न केवल प्रदूषण कम होगा, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा भी बढ़ेगी और नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
वन संरक्षण और बजट

2.1 वन संरक्षण के लिए प्रोत्साहन (Incentives for Forest Conservation):
सरकार को वन संरक्षण के लिए वित्तीय प्रोत्साहन देना चाहिए। इससे किसानों और स्थानीय समुदायों को वनों को संरक्षित करने में मदद मिलेगी। वन संरक्षण से जैव विविधता बनी रहती है और पर्यावरणीय संतुलन संरक्षित रहता है। 2.2 वन्य जीव संरक्षण (Wildlife Conservation):
वन्य जीव संरक्षण के लिए बजट में विशेष वित्तीय प्रावधान होना चाहिए। इससे विलुप्तप्राय प्रजातियों का संरक्षण किया जा सकता है और उनके प्राकृतिक आवास का पुनर्वास किया जा सकता है।
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जल संसाधन और बजट
जल संरक्षण (Water Conservation):
जल संरक्षण के लिए वित्तीय प्रावधान होना चाहिए। इससे जल संकट का समाधान हो सकेगा और जल संसाधनों का स्थायी उपयोग सुनिश्चित हो सकेगा। 3.2 सिंचाई परियोजनाएं (Irrigation Projects):
किसानों के लिए सिंचाई परियोजनाओं में निवेश करना चाहिए। इससे वे प्रभावी रूप से जल का उपयोग कर सकते हैं और कृषि उत्पादकता में वृद्धि कर सकते हैं।
कचरा प्रबंधन और बजट
शहरों और गांवों में प्रभावी कचरा प्रबंधन के लिए बजट में वित्तीय प्रावधान होना चाहिए। इससे पर्यावरण स्वच्छ रहेगा और जनस्वास्थ्य में सुधार होगा। रीसाइक्लिंग उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए बजट में विशेष योजनाएं होनी चाहिए। इससे कचरे की मात्रा कम होगी और संसाधनों का पुनः उपयोग संभव होगा।
बजट में कृषि नीतियाँ
जैविक कृषि (Organic Farming)
जल प्रबंधन (Water Management)
कृषि में जल प्रबंधन के लिए विशेष बजट प्रावधान होना चाहिए। इससे सिंचाई के लिए पानी का समुचित उपयोग हो सकेगा और जल संसाधनों की बचत होगी।
परिवहन और पर्यावरण
शहरी विकास और पर्यावरण
स्मार्ट शहर (Smart Cities)
स्मार्ट शहरों के विकास के लिए बजट में विशेष वित्तीय प्रावधान होना चाहिए। इसमें ऊर्जा संरक्षण, जल प्रबंधन और हरित क्षेत्रों का विकास शामिल है।
हरित क्षेत्र (Green Spaces)
शहरी क्षेत्रों में हरित क्षेत्रों का विकास करने के लिए बजट में विशेष योजनाएं होनी चाहिए। इससे वायु गुणवत्ता में सुधार होगा और नागरिकों के लिए स्वस्थ वातावरण प्रदान होगा।
बजट में प्राकृतिक जीवन के लिए प्रबंधन :

सामान्यत: बजट मुख्य रूप से मानव समाज के आर्थिक और विकासात्मक जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाता है, लेकिन इसमें पर्यावरण और वन्य जीवों के संरक्षण के लिए भी प्रावधान होते हैं। वन्य जीवों और पर्यावरण के संरक्षण के लिए बजट में निम्नलिखित तरीकों से प्रावधान हो सकते हैं:
वन्य जीव संरक्षण योजनाएँ
बजट में वन्य जीवों के संरक्षण के लिए विशेष योजनाएँ होती हैं, जिनके तहत राष्ट्रीय उद्यानों, अभयारण्यों और वन्यजीव संरक्षण क्षेत्रों के विकास और संरक्षण के लिए वित्तीय प्रावधान किए जाते हैं। इससे वन्य जीवों के प्राकृतिक आवास को संरक्षित किया जा सकता है।
पशु चिकित्सा सेवाएँ
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पशु चिकित्सा सेवाओं के लिए बजट में प्रावधान किए जाते हैं। इससे पशुओं की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होता है और उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिलती हैं।
प्रजनन और संरक्षण कार्यक्रम
विलुप्तप्राय प्रजातियों के प्रजनन और संरक्षण के लिए बजट में विशेष वित्तीय प्रावधान हो सकते हैं। इन प्रोग्राम्स के तहत विलुप्तप्राय प्रजातियों की संख्या बढ़ाने और उनके संरक्षण के प्रयास किए जाते हैं।
जागरूकता कार्यक्रम
वन्य जीवों के संरक्षण और पशु कल्याण के लिए जागरूकता कार्यक्रमों के लिए बजट में प्रावधान किए जाते हैं। इससे लोगों में वन्य जीवों और पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ती है और संरक्षण के प्रयासों में सहयोग मिलता है।
विधायी प्रावधान
पशु क्रूरता निवारण और वन्य जीवों के संरक्षण के लिए विभिन्न विधायी प्रावधान बजट में शामिल होते हैं। इसके तहत विभिन्न नियम और कानून बनाए जाते हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य होता है।
विपदा प्रबंधन
प्राकृतिक आपदाओं के दौरान वन्य जीवों और पशुओं की सुरक्षा के लिए बजट में विशेष प्रावधान किए जाते हैं। इससे आपदाओं के समय पशुओं की सुरक्षा और राहत कार्यों में मदद मिलती है।
निष्कर्ष
भले ही बजट मुख्य रूप से मानव समाज के विकास को ध्यान में रखकर बनाया जाता है, लेकिन वन्य जीवों और पर्यावरण के संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण प्रावधान होते हैं। यह सुनिश्चित करता है कि हमारे प्राकृतिक संसाधनों और वन्य जीवों का संरक्षण हो सके और हमें एक स्थायी और संतुलित विकास की दिशा में बढ़ने में मदद मिले।एक संतुलित बजट, जिसमें पर्यावरण को ध्यान में रखा गया हो, न केवल हमारे वर्तमान को सुधारता है, बल्कि हमारे भविष्य को भी सुरक्षित करता है। हमें ऐसी नीतियों की आवश्यकता है जो आर्थिक और पर्यावरणीय दोनों दृष्टिकोणों से लाभकारी हों। जब हम पर्यावरण संरक्षण के लिए बजट में उचित प्रावधान करते हैं, तो हम वास्तव में एक स्थायी और समृद्ध भविष्य की दिशा में कदम बढ़ाते हैं।
