Climate change in india|जलवायु परिवर्तन के कारण भारत को 4.83 लाख करोड़ रुपए का नुक़सान।

Dhumal Aniket

Updated on:

Publisher - Forest Timbi Media

Climate change in india

Climate change in india: आज दुनिया भर में चरम मौसमी घटनाओं का सिलसिला लगातार बढ़ रहा है। भारत समेत विश्व के कई हिस्सों में बेमौसम बारिश, बाढ़, भूस्खलन, असामान्य तापमान और प्राकृतिक आपदाओं ने भारी तबाही मचाई है। यह साफ संकेत है कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य की समस्या नहीं बल्कि वर्तमान की सच्चाई बन चुका है।

क्या यह स्थिति यूं ही बनी रहेगी?

Climate change in india

विज्ञान और जलवायु मॉडल बताते हैं कि अगर हम अपनी गैसों के उत्सर्जन को नहीं रोकेंगे, तो यह स्थिति और खराब होगी। अंतरराष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन पैनल (IPCC) की रिपोर्ट्स कहती हैं कि:

1.ग्रीनहाउस गैसों जैसे CO2, मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड का स्तर बढ़ रहा है

2.वैश्विक तापमान पिछले दशक में लगभग 1.1°C बढ़ा है

3.समुद्र का जल स्तर ग्लेशियर के पिघलने की वजह से हर साल 3.3 मिमी बढ़ रहा है

जलवायु परिवर्तन में भारत का नुकसान

भारत को जलवायु परिवर्तन के कारण 2019 से 2023 के बीच लगभग 56 बिलियन डॉलर (लगभग 4.83 लाख करोड़ रुपए) का नुकसान हुआ है।

इस नुकसान की रकम से भारत:

  • 100 से अधिक सौर ऊर्जा संयंत्र लगा सकता था।
  • राष्ट्रीय पौधारोपण कार्यक्रम को 50 गुना बढ़ा सकता था।
  • जल संरक्षण और नवीकरणीय ऊर्जा में बड़ा निवेश कर सकता था।

सरकार ने पर्यावरण मंत्रालय के लिए 2025-26 में 3,412.82 करोड़ रुपए का बजट दिया है, जो पिछले वर्ष के 3,125.96 करोड़ रुपए से करीब 9% अधिक है। लेकिन यह राशि अब भी नुकसान के मुकाबले कम है।

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भारत में 2024-25 में प्रमुख घटनाएं

  • कई जगह तापमान 48°C से भी ऊपर गया
  • उत्तराखंड के उत्तरकाशी में अचानक बाढ़ और हिमस्खलन हुआ
  • जम्मू-कश्मीर में किश्तवाड़ में बादल फटने से भारी नुकसान हुआ
  • पंजाब और दिल्ली में असामान्य बाढ़ और बारिश हुई
  • पूर्वोत्तर भारत में बार-बार बाढ़ से लाखों प्रभावित हुए

इन घटनाओं से:

  • कृषि उत्पादन 15-20% तक कम हुआ
  • जल संसाधन की कमी बढ़ी
  • लोगों में हीट स्ट्रोक और अन्य रोग बढ़े
  • ग्रामीण इलाके आर्थिक तौर पर प्रभावित हुए

वैश्विक जलवायु संकट

यूरोप में भयंकर तूफान और बाढ़ ने भारी जनहानि की,चीन के कुछ हिस्सों में 40°C से अधिक गर्मी और भारी मानसून बाढ़ आई,अमेरिका के कैलिफोर्निया में 2024 में जंगल की आग ने 50 लाख एकड़ से ज्यादा क्षेत्र जला दिया,हवाई गुणवत्ता खराब हुई, और लाखों वन्यजीव मरे,हांगकांग में 24 घंटे में 600 मिमी से अधिक बारिश हुई, मेट्रो और हवाई अड्डा बंद हुआ।

छोटे द्वीप राष्ट्रों पर मंडराता संकट

तुवालू जैसे द्वीप देश जो लगभग 11,800 लोग रहते हैं, समुद्र के बढ़ते जल स्तर के कारण अस्तित्व के खतरे में हैं। वहाँ समुद्र का जल स्तर हर साल 5-6 मिमी बढ़ रहा है और अगले दशक में डूबने की आशंका है।

भारत समेत दुनिया के अन्य देशों के यह बदलाव करने ही होंगे

  1. 2070 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य पूरा करना
  2. 2030 तक 50% स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन
  3. राष्ट्रीय स्तर पर बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण
  4. जल संरक्षण के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग और जल पुनर्चक्रण

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