Forest Fire In India 2024|
भारत समेत पूरी दुनिया जंगल में लगने वाली आग से परेशान है। इस आग से जंगल ही नहीं बल्कि कई जानवरों की प्रजातियां भी नष्ट हो जाती है। पिछले दो दशकों में यानी की 2001 से भारत में लगभग 1 लाख एकड़ तक जंगल मैं नष्ट हो चुके हैं ।दुनिया में देखा जाए तो 2001 के तुलना में जंगलों में लगने वाली आज 7,500,000 एकड़ वन ज्यादा जले हैं।
भारत में जंगलों में आग लगने कब शुरू होती है?
भारत गर्मी का मौसम शुरू होने के साथ जंगलों में आग लगना भी बड़ी मात्रा में शुरू होती है। ज्यादातर जंगलों में आग लगने के मामले फरवरी आखरी हफ्ते से लेकर मे महिने तक होते हैं. इसका समय लगभग 12 से 13 हफ्तों का होता है।
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जंगलों में लगी आग का कैसे पता चलता है?
फॉरेस्ट सर्वे ऑफ़ इंडिया के अनुसार भारत में नवंबर 2020 से लेकर 21 तक MODIS(Moderate Resolution Imaging Spectro-Radiometer) सेटेलाइट में लगी इस सेंसर का इस्तेमाल करके 52785 बार जंगल में आग लगने का पता लगाया गया।

SNPP-VIIRS(Suomi-National Polar-orbiting Partnership – Visible Infrared Imaging Radiometer Suite) इस सेंसर के द्वारा 3,45,989 बार लगने वाली आज घटनाओं का पता लगाया यह घटनाएं हर साल बढ़ती जा रही है। यह सेंसर 24 घंटे में छह बार आग घटनाओं की जानकारी वन विभागों को देता रहता है। यह दोनों सेंसर नासा क के एक्वा और टेरा सेटेलाइट पर लगे हुए हैं ।
जंगल में लगने वाली आग में कितना नुकसान होता है?
भारत का 1100 करोड़ हर साल होने वाली आग पर नियंत्रण पाने के लिए होता है। जंगल पर जब बड़े स्तर की आग लगती है तो कर्मचारियों की कमी, पैसे की कमी, सुरक्षा की कमी, जल्द नियंत्रण ना पाना, ऐसे कारणों की वजह से जंगलों एवं प्रकृति का सबसे ज्यादा नुकसान होता है। भारत हमेशा ऐसी समस्याओं से जूझ रहा है।
जंगल में लगने वाली आग वहां पर बसी जैव विविधता को बड़ी मात्रा में नुकसान पहुंचती है। कई सारे पशुओं के घर जल कर राख होते है। खाना मिलने के स्रोत खत्म होते हैं, बहुत से बूढ़े जानवर ऐसी स्थिति में मारे जाते हैं।कई जंगली जानवर इंसानों के संपर्क में आते हैं ऐसी कोई घटनाए हमने देखी है,सुनी है।
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भारत में जंगलों में लगने वाली आग (Forest Fire) एक गंभीर लेकिन कम समझी गई पर्यावरणीय समस्या है। यहां कुछ अनकही और चौंकाने वाली बातें दी गई हैं, जो सामान्यतः लोगों को पता नहीं होतीं:
जंगल की आग की अनकही बातें (Hidden Facts about Forest Fire)
1. 95% जंगल की आग इंसानों द्वारा लगती है
- प्राकृतिक कारणों (जैसे बिजली गिरना) से कम, जबकि लकड़ी काटना, बीड़ी-सिगरेट फेंकना, शिकार या जमीन कब्जा करने के लिए जानबूझकर आग लगाई जाती है।
- ग्रामीण इलाकों में खेती के लिए “झूम” खेती (slash-and-burn) इसका बड़ा कारण होती है।
2. जंगल की आग “प्राकृतिक संतुलन” भी बनाए रखती है
- कुछ जंगलों में, नियंत्रित रूप से लगने वाली आग पुराने, सड़े-गले पौधों को नष्ट करके नई वनस्पतियों को उगने का मौका देती है।
- लेकिन भारत जैसे घने वनों में, बिना नियंत्रण की आग विनाशकारी होती है।
3. आग बुझाने के लिए जरूरी नहीं हमेशा पानी ही इस्तेमाल किया जाए
- कई बार मिट्टी, बालू, हरी टहनियां या “फायर लाइन्स” (जंगल को टुकड़ों में बांटना) का प्रयोग किया जाता है।
- पहाड़ी इलाकों में हेलिकॉप्टर से अग्निरोधक केमिकल गिराए जाते हैं।
4. कुछ पेड़ जैसे “चिर पाइन” (Chir Pine) आग को तेज करते हैं
- उनके पत्तों और रेजिन में अत्यधिक ज्वलनशील तत्व होते हैं, जिससे आग और तेज फैलती है।
- उत्तराखंड व हिमाचल में यही प्रजाति जंगल की आग में सबसे बड़ा योगदान देती है।
5. आग का असर सिर्फ पेड़ों पर नहीं, जमीन के नीचे भी होता है
- मिट्टी में मौजूद पोषक तत्व, जैविक सामग्री और कीटाणु नष्ट हो जाते हैं, जिससे अगली पीढ़ी की वनस्पति पर असर पड़ता है।
- कभी-कभी आग जड़ों के रास्ते भूमिगत भी फैलती है।
6. जंगल की आग ग्लोबल वॉर्मिंग को और बढ़ाती है
- आग से निकलने वाला कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन व ब्लैक कार्बन न सिर्फ वायु को प्रदूषित करते हैं, बल्कि ग्लेशियर पिघलाने और मौसम को अस्थिर करने में भी योगदान देते हैं।
7. आग के धुएं से पक्षियों और जानवरों की दिशा भ्रमित हो जाती है
- उनके नेविगेशन सिस्टम पर असर पड़ता है, जिससे वे अपने घरों से भटक जाते हैं और कभी-कभी मर भी जाते हैं।
8. जंगल की आग की रिपोर्टिंग में भारी कमी है
- कई बार स्थानीय प्रशासन या वन विभाग आग की सूचना या नुकसान को रिपोर्ट ही नहीं करता, जिससे डेटा अधूरा रहता है और नीतियां कमजोर बनती हैं।
9. सबसे ज्यादा जंगल की आग मार्च से मई तक लगती है
- यह समय शुष्क मौसम का होता है, जब सूखे पत्ते, कम आर्द्रता और तेज गर्मी आग को फैलाने में मदद करते हैं।
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रोकथाम और समाधान
- स्थानीय समुदायों की भागीदारी: आग की रोकथाम और नियंत्रण में स्थानीय लोगों की भूमिका महत्वपूर्ण है। उनकी पारंपरिक ज्ञान और अनुभव का उपयोग करके आग की घटनाओं को कम किया जा सकता है।
- प्रौद्योगिकी का उपयोग: उन्नत निगरानी प्रणालियों, जैसे सैटेलाइट इमेजरी और ड्रोन, का उपयोग करके आग की घटनाओं का शीघ्र पता लगाया जा सकता है और त्वरित प्रतिक्रिया दी जा सकती है।
- वन प्रबंधन में सुधार: वनों में सूखी पत्तियों और अन्य ज्वलनशील पदार्थों की सफाई, फायर ब्रेक्स का निर्माण और नियंत्रित जलन जैसी रणनीतियों को अपनाकर आग के खतरे को कम किया जा सकता है।
