Pollution in india 2024|प्रदूषण के मामले मे कुछ ना करने की भारत की चाहत।

Dhumal Aniket

Updated on:

Publisher - Forest Timbi Media

Pollution in india 2024

Pollution in India : हम किसी देश को विकसित या विकास की सीढ़ी पर तभी मान सकते हैं। जब वे अपनी भूमि की योजना पर्यावरणपुरक सुदृढ़ विकास के साथ बनाते हैं। यदि कोई देश पर्यावरणीय रूप से विकसित नहीं हो पाता है, तो वह लंबे समय तक आर्थिक रूप से जीवित नहीं रह पाएगा। इस दुनिया में हर मानव जीवन या पशु जीवन की शुरुआत प्रकृति से होती है। आज जलवायु परिवर्तन एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है और इसका असर मानव जीवन के साथ-साथ जानवरों और जंगलों पर भी देखने को मिल रहा है। आज हम भारत के अत्यधिक प्रदूषित शहरों के बारे में बात करने जा रहे हैं।

‘विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट 2023’ के अनुसार, औसत वार्षिक PM2.5 सांद्रता 54.4 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है।
विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट 2023 के अनुसार, वार्षिक पीएम 2.5 सांद्रता 54.4 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है।
बांग्लादेश पहले स्थान पर है, उसके बाद पाकिस्तान दूसरे और भारत तीसरे स्थान पर है। ये देश बहुत कम गुणवत्ता वाली हवा का उपयोग करने वाले सबसे बड़े प्रदूषक हैं।जो हवा जीवन के पांच से छह साल तक कम करने की क्षमता रखतीं हैं।

भारत का सबसे बड़ा शहर कौन सा है?


बिहार राज्य का बेगुसराई दुनिया का पहला शहर है। जहां सबसे अधिक प्रदूषित हवा है। बेगुसूराई में प्रदूषण का आंकड़ा 118.9 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है. इस शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स 400 से ऊपर है।
जो कि WHO के दिशानिर्देशों से लगभग 17 गुना अधिक है। यह एक बड़ा मुद्दा है और इसने लोगों के जीवन को लगभग 15 वर्ष कम कर दिया है। हवा में मौजूद छोटे कण सभी प्रकार के मानव और अन्य जानवरों के शरीर के लिए बहुत खतरनाक होते हैं। ऐसी जगहों पर अस्थमा का प्रचलन बहुत अधिक है। लेकिन जब वायु गुणवत्ता सूचकांक की बात आती है, जब कोई ऐसा शहर इस सूचकांक में शीर्ष पर होता है, तब प्रशासन जागता है। जब बेगुसराई में एयर क्वालिटी इंडेक्स आया और सड़क पर प्रशासन के द्वारा पाणी छिडके जाने की खबर आती है। लेकिन इतनी छोटी चीजें बड़े नुकसान की भरपाई कैसे कर सकती हैं?
ये आंकड़े लगातार बदल रहे हैं और रोजाना बदल रहे हैं।
आज बेगुसराई पहिले स्थान पर हैं।अगले दिन दिल्ली या कोई अन्य शहर हो सकता है।यह आंकड़ा हर दिन होने वाले प्रदूषण पर निर्भर करता है.
जैसा कि आप पढ़ रहे हैं, इस सूची में नाम किसी दूसरे शहर का हो सकता है।

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भारत में किस काम के लिए जंगल काटे जा रहे है?

दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में कितने भारतीय शहर हैं?


दुनिया के पचास सबसे प्रदूषित शहरों में से आपको आश्चर्य होगा कि 42 शहर भारत में हैं। इसमें दिल्ली, गुवाहाटी, गुड़गांव, बेगुसराई जैसे 38 और शहर हैं।

प्रदूषण रोकने के लिए सरकार क्या कर रही है?

भारत सरकार की ओर से कहा गया है कि वह प्रदूषण को रोकने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दे रही है। इसके अलावा वे बड़ी संख्या में लोगों को खाना पकाने के लिए एलपीजी गैस की आपूर्ति कर रहे हैं और यह भी कह रहे हैं कि उन्होंने कई घर निर्माणों के लिए कानून कड़े कर दिए हैं।ताकि धूल को हवा में फैलने से रोका जाये। बडी बडी इमारतो के निर्माण के लिए सभी निर्देशो का पालन किया जाये। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में भारत प्रदूषण के मामले में सबसे आगे है। एक अच्छा नेतृत्व भारत को ऐसी समस्याओं को हल करने में मदद कर सकता है। हमने जो बात की है वह केवल वायु प्रदूषण के संदर्भ में है। अगर हम अन्य प्रदूषण और पर्यावरणीय स्थिती की बात करें तो यह सूची काफी लंबी हो जाएगी।


प्रदूषण के मामले में भारत की कुछ न करने की चाहत: एक चिंताजनक स्थिति है।

आज जब दुनिया जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है, ऐसे समय में भारत जैसे देश की निष्क्रियता कई सवाल खड़े करती है। भारत दुनिया के सबसे प्रदूषित देशों में से एक है, फिर भी प्रदूषण नियंत्रण के लिए जो जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए, वे या तो बहुत धीरे उठाए जा रहे हैं या फिर केवल कागजों पर सीमित हैं।

नीतियों की भरमार, लेकिन क्रियान्वयन में कमजोरी

भारत में पर्यावरण को लेकर कई कानून और नीतियाँ बनी हुई हैं, जैसे कि वायु (प्रदूषण नियंत्रण) अधिनियम, जल अधिनियम, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम आदि। लेकिन इन नीतियों का क्रियान्वयन ज़मीनी स्तर पर बेहद कमजोर है। अक्सर देखा गया है कि उद्योगों को पर्यावरण के प्रति जवाबदेह ठहराने की बजाय उन्हें छूट दी जाती है।

राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी

प्रदूषण कोई नया मुद्दा नहीं है, लेकिन भारत में यह चुनावी मुद्दा कभी नहीं बन पाया। नेता विकास के नाम पर बड़े-बड़े प्रोजेक्ट तो शुरू करते हैं, लेकिन पर्यावरणीय प्रभावों की अनदेखी करते हैं। जब तक पर्यावरण को राजनीतिक प्राथमिकता नहीं मिलेगी, तब तक सुधार की उम्मीद करना मुश्किल है।

सार्वजनिक भागीदारी और जागरूकता की कमी

भारत में पर्यावरण संरक्षण को लेकर आम नागरिकों की जागरूकता अभी भी सीमित है। लोग यह समझने में देर कर रहे हैं कि उनका स्वास्थ्य, जीवनशैली और भविष्य सीधे तौर पर प्रदूषण से जुड़ा हुआ है। जब तक लोग स्वयं आगे नहीं आएंगे, तब तक सरकारों पर दबाव नहीं बनेगा।

विकास बनाम पर्यावरण: संतुलन की जरूरत

भारत तेजी से विकासशील देश है। लेकिन इस विकास की कीमत पर्यावरण चुका रहा है। पेड़ कट रहे हैं, नदियाँ प्रदूषित हो रही हैं, और हवा सांस लेने लायक नहीं रही। हमें विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाना होगा, नहीं तो भविष्य खतरे में है।

समाधान की दिशा में कदम

भारत को अब “कुछ न करने की चाहत” से बाहर आकर ठोस कदम उठाने की जरूरत है:

  • प्रदूषण फैलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई
  • स्वच्छ ऊर्जा और हरित तकनीक का विस्तार
  • स्कूलों और कॉलेजों में पर्यावरण शिक्षा
  • स्थानीय स्तर पर जनभागीदारी
  • पर्यावरणीय मुद्दों को राजनीतिक एजेंडे में लाना

निष्कर्ष:

भारत को अब यह समझना होगा कि प्रदूषण केवल पर्यावरण की समस्या नहीं, बल्कि यह स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास से जुड़ा एक गंभीर संकट है। अगर अभी भी हमने सक्रियता नहीं दिखाई, तो आनेवाली पीढ़ियों को इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ेगा।


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