Reasons of deforestation in India|
भारत अपने हर क्षेत्र में लगातार बढोत्री कर रहा है।लगातार विकसित हो रहा है और इसी विकास के साथ भारत अपने जंगल भी खोता जा रहा है। जी हा आप बिल्कुल सही सून रहे है क्योंकि भारत ने वर्ष २००० से लेकर २०२३ तक २.३३ मिलियन हेक्टर याने की ५०.८२५ लाख एकड़ वृक्ष का आवरण गवा चुका है । जो की पर्यावरण में बदलाव लाने के लिए बहुत अहम भूमिका बजाता है। यह क्षेत्र लगभग भारत के मेघालया राज्य से भी ज्यादा है। आपको जो यह आकडे बताये गये है वह प्राकृतिक जंगलों के है। प्राकृतिक जंगल माने तो प्रकृती के द्वारा निर्माण किये गये जिसमे सभी प्रकार के पेड, पौधे और घास अपने आप यानी की बिना मनुष्य के सहायता से उगती है। उसको प्राकृतिक जंगल जो की प्रकृती के द्वारा बनाया गया हुआ कहते है। एक अध्ययन के अनुसार, दुनियाँ मे लगभग हर दिन ४ करोड से भी ज्यादा पेड काटे जाते है। यह आकडे कही गुना ज्यादा हो सकते है। क्योंकि यह जानकारी निकालना बहुत कठीण और असामान्य काम है। क्योंकि इस पेडों को कहीं कारणों से काटा जाता है। जैसे लकडी जलाने के लिए ग्रामीण इलाकों में अभी भी ज्यादा तर लोग अपना खाना बनाने के लिए लकडी का इस्तेमाल करते है। अगर इसे कमर्शियल तौर पर देखा जाये तो इसका इस्तेमाल पेपर बनाने के लिए, फर्निचर बनाने के लिए भी किया जाता है।
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भारत मे सबसे कम वन क्षेत्र कहा पर है?
अपने कुल क्षेत्रफल का केवल 6.7% कवर करने वाला हरियाणा भारत में सबसे छोटा वन और वृक्ष क्षेत्र वाला राज्य है । हर राज्य के लिए राष्ट्रीय उसके कुलक्षेत्र का २०% वृक्षावरण होना जरूरी है। यह राष
भारत मे सबसे ज्यादा वनक्षेत्र कहा पर है?
मध्यप्रदेश मे सबसे जादा वन क्षेत्र मौजूद है।मध्य प्रदेश में वन क्षेत्र राज्य के भौगोलिक क्षेत्र का 30.71% और देश के वन क्षेत्र का 12.4% है, जो इसे सबसे बड़ा वन क्षेत्र वाला राज्य बनाता है।
किस काम के लिए हमारी वनक्षेत्र/जंगल काटे जाते है ?
भारत जनसंख्या के मामलें में दुनिया में पहले स्थान/शीर्ष पर है। जिस गती से भारत की आबादी बढ रहीं है। जनसंख्या बढ रही है उसी तरह से भारत के शहरे भी लगातार बढ रहे है । लोगों की आवश्यकताओं को पूर्ण करणे हेतू वनक्षेत्र को लगातार गवा जा रहा है। यह भारत में ही नही आप देखेंगे तो पूरी दुनिया की बडी़ समस्या हो चुकीं है। वन कटाई के मामले में भारत दुनियाँ में दुसरे स्थान पर विराजमान है।

1. लकडी के लिए
लकडी का इस्तेमाल फर्निचर बनाने के लिए कागज बनाने के लिए और खाना बनाने के लिए भी भारत मे सबसे ज्यादा लकडियों का इस्तेमाल किया जाता है। कहीं प्रकार के खिलौने और खेल सामग्री के लिए भी लकड़ी को काफी उपयोग मे लाया जाता है।
उपयोग में लाया जाता है।
2.खेती के लिये- (Reasons of deforestation in india)
दुनिया मे सबसे ज्यादा जंगल खेती के लिए काटे जाते है । काही बार आपने गुगल के द्वारा शेअर कि गई सॅटेलाईट की तस्वीरे देख पाते है जिसमे पे ड काटकर बडी मात्रा मे खेती के लिये जमीन उपलब्ध कराई जाती है।
3.बढती आबादी को देखते हुए
भारत जनसंख्या की मामले में प्रथम स्थान पर है। १४५ करोड जनसंख्या के लिए और उनकी आवश्यकताओं को पूर्ण करने के लिए बडी मात्रा में वनक्षेत्र को हानी हुई है। वन क्षेत्र के किनारे पे कोई शहर बसा होता है उसके विस्तार के लिए वहाँ पर ज्यादा मात्रा मे रस्ते बनाने के लिए जंगलों को हटाया जाता है। भारत में ऐसे कईं सारे बडे़ बडे़ शहर है जिसके लिए बहुत बडी़ मात्रा में वन क्षेत्र को हम खोते गयें हैं।
4. कागज बनाने के लिए
दुनिया मे बहुत ज्यादा मात्रा में हम कागज केलीये पेड काटे जाते है। लेकिन भारत के Indian Pulp and Paper Technical Association (IPPTA) (भारतीय लुगदी एवं कागज तकनीकी संघ)के अनुसार, भारत देश मे लगबग ७७- ८०% कागज पुनर्नवीनीकृत (Recycling) के द्वारा पुनः उपयोग में लाया जाता है। इसी के साथ वह ये भी कहते है की भारत मे सालाना २.५ करोड टन कागद का निर्माण होता है और उसमे से लगभग १.८ करोड टन कागद का निर्माण रिसायकलिंग के द्वारा कीया जाता है। उसके लिए जंगलों में से पेड़ नहीं काटे जाते है और इसी के साथ वह ये भी दावा करते है की कागज बनाने के लिए ज्यादातर पेड़ खरीदते है जो पेड किसान अपने खेतों में लगाते है।
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5. मायनिंग(खनन) के लिये
मायनिंग के लिए भारत मे कई जगह पर १० से २० प्रतिशत जंगल या वनक्षेत्र को मारा जाता है।२००९ -२०१० के एक रिपोर्ट के अनुसार , भारत की खदानों में लगभग तीस लाख लोगो को रोजगार दिया गया है। भारत मे कही तरह की खदानें है जिनकी संख्या लगभग ३००० से ज्यादा होती है। जैसे ही नई खदानें मिल जाती है। पुरानी खदानों को छोड़ दिया जाता है । भारत मे कोयला, चुना पत्थर, लोह, मॅग्नीज, बॉक्साईट ऐसी कही तरह की खदानें है। खदानों के मामले में भारत दुनिया में ४ थे स्थान पर मौजूद है। लेकिन इसका बहुत बडा असर हमारी पर्यावरण पडा हुआ है । बडी मात्रा में जहरीली हवा पर्यावरण में फैल जाती है।भूमी बंजर हो जाती है।
भारत के छत्तीसगड राज्य मे कोयला खनन के लिए बहुत बडी मात्रा मे पेड़ काटे जा चुके है । कोयले जैसी चीजे जंगलो के नीचे ही पाई जाती है जिसके कारण बडी बडी कंपनीयाँ सरकार से अनुमती लेकर वनक्षेत्र को नष्ट करणे मे लग जाते है। इसका उदाहरण छत्तीसगड राज्य या मध्य प्रदेश में बडी़ मात्रा मे देखा जा सकता है। जंगलो के किनारो पर सालों से बैठें हुए गावों को उजाड दिया जाता है । जैवविविधता को बडी मात्रा मे नुकसान पहुचाया जाता है । लेकिन इसका सिधा सा संबंध हमारे जीवन में भी है। उसी खदान से निकले हुए कोयले से हमे बिजली प्राप्त होती है। इसीलिए हमे बिजली का उपयोग भी सही मात्रा मे सही काम के लिए करना चाहिए। सौ बात की एक बात अपनी आवश्यकताओं को कम करो । अपनी जरूरत को कम करो। अगर आप पर्यावरण की प्रति जागरूक है तो।
जंगलों को बचाने की अनकही बातें: हर पेड़ एक कहानी कहता है
जब भी हम पर्यावरण संरक्षण की बात करते हैं, तो सबसे पहले ‘जंगल बचाओ’ का नारा सुनाई देता है। लेकिन क्या हम वास्तव में समझते हैं कि जंगलों का महत्व क्या है? और क्यों इनका संरक्षण केवल एक ‘पर्यावरणीय मुद्दा’ नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व का सवाल है? आइए जानते हैं जंगलों को बचाने की कुछ अनकही बातें, जो आमतौर पर चर्चा में नहीं आतीं।
1. जंगल सिर्फ पेड़ नहीं होते, वो एक जीवित दुनिया होते हैं
हर जंगल एक जीवंत पारिस्थितिक तंत्र है – जहाँ पेड़, पौधे, पक्षी, कीट, जानवर, और सूक्ष्म जीव एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। जब एक पेड़ कटता है, तो उसके साथ एक पूरा ‘जीव-जगत’ टूटता है।
2. वनवासी समाज जंगलों के साथ जीते हैं – उनके बिना वे उजड़ जाते हैं
आदिवासी और वनवासी समुदाय जंगलों में रहते नहीं, जंगलों के साथ जीते हैं। जब हम विकास के नाम पर जंगल काटते हैं, तो हम सिर्फ हरियाली नहीं, बल्कि एक पूरी संस्कृति, भाषा, परंपरा और जीवनशैली मिटा देते हैं।
3. जंगल हमारी दवाओं का भंडार हैं – जिन्हें हम भूलते जा रहे हैं
भारत के जंगलों में हजारों औषधीय पौधे पाए जाते हैं – जिनसे आयुर्वेद, होम्योपैथी और एलोपैथी तक में दवाएं बनती हैं। कई ऐसी औषधियां जो कैंसर, मधुमेह और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों में उपयोगी हैं – उनका स्रोत जंगल ही हैं।
4. जंगल बारिश लाते हैं, जलवायु को संतुलित करते हैं
जंगलों से वाष्प वायुमंडल में जाती है, जो बादल बनाकर बारिश लाती है। जंगलों के कटने से सूखा, अनियमित मानसून, और ग्लोबल वॉर्मिंग जैसी समस्याएं बढ़ती हैं।
5. पेड़ों की चुप्पी में एक चेतावनी छुपी है
पेड़ कभी चीखते नहीं, वे चुपचाप कट जाते हैं। लेकिन हर कटता पेड़, हर उजड़ता जंगल, हमें एक चेतावनी देता है – कि अगर हमने समय रहते नहीं संभला, तो अगला नंबर हमारा हो सकता है।
6. जंगलों को बचाना सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं
- हर नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह जंगलों के संरक्षण के लिए आवाज उठाए।
- पेड़ लगाएं नहीं, उन्हें बढ़ने दें – जंगल बनने दें।
- कागज, लकड़ी और प्लास्टिक का कम से कम उपयोग करें।
- ऐसी कंपनियों को न चुनें जो वनों की कटाई में लिप्त हैं।
जंगल सिर्फ ऑक्सिजन नहीं देते, वे जीवन देते हैं।
हमारा भविष्य, हमारे बच्चों का भविष्य – सब कुछ इस पर टिका है कि आज हम जंगलों को बचाने के लिए क्या करते हैं।
अब समय आ गया है कि हम सिर्फ “विकास” की दौड़ में न भागें, बल्कि “संरक्षण” की दिशा में चलना शुरू करें – क्योंकि हर पेड़ एक कहानी कहता है, और हर कहानी को बचाया जाना चाहिए।
