South Korea wildfire in hindi: दक्षिण कोरिया के दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र में हाल ही में भड़की जंगल की आग ने देश के इतिहास में एक भयावह आपदा का रूप ले लिया है। इस विनाशकारी आग ने न केवल मानव जीवन को प्रभावित किया है, बल्कि वन्यजीवों, सांस्कृतिक धरोहरों और पर्यावरण को भी गंभीर क्षति पहुंचाई है।
दक्षिण कोरिया में हाल ही में लगी भीषण जंगल की आग ने पर्यावरण और वन्यजीवों पर गंभीर प्रभाव डाला है। हालांकि, वर्तमान में उपलब्ध सूचनाओं के अनुसार, वन्यजीवों के नुकसान के बारे में सटीक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। आमतौर पर, ऐसी आपदाओं में वन्यजीवों को भारी क्षति होती है, लेकिन दक्षिण कोरिया की इस विशेष घटना में पशु-पक्षियों पर पड़े प्रभाव के बारे में विस्तृत जानकारी फिलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है।
आग की शुरुआत और फैलाव कैसे हुआ ?

यह भीषण आग बीते शुक्रवार को शुरू हुई और कहां जा रहा है कि तेज़ हवाओं तथा शुष्क मौसम के कारण तेजी से फैल गई। सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र उत्तरी और दक्षिणी ग्योंगसांग प्रांतों के अलावा उल्सान शहर रहे, जहां आग ने व्यापक स्तर पर विनाश किया। तेज़ हवाओं ने आग बुझाने के प्रयासों को और भी चुनौतीपूर्ण बना दिया, जिससे आग पर काबू पाना मुश्किल हो गया।
आग के कारण क्या हो सकते हैं ?

- दक्षिण कोरिया में हाल ही में अत्यधिक शुष्क परिस्थितियां बनी हुई थीं, जिससे जंगल में आग लगने की संभावना बढ़ गई।
- आग के फैलने में तेज़ हवाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इससे आग तेजी से अन्य क्षेत्रों तक फैल गई, जिससे नुकसान और बढ़ गया।
- विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम के पैटर्न बदल रहे हैं, जिससे शुष्क और गर्म परिस्थितियों की आवृत्ति बढ़ रही है।
प्रारंभिक जांच में यह भी संदेह है कि यह आग मानवीय लापरवाही से भी लग सकती है, हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
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जनहानि कितनी हुई है ?
इस आपदा में अब तक कम से कम 27 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें चार अग्निशामक और सरकारी कर्मचारी शामिल हैं। इसके अलावा, 19 अन्य लोग घायल हुए हैं, जिनमें से छह की हालत गंभीर बताई जा रही है। आग के कारण 37,000 से अधिक लोगों को अपने घरों से सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है, जिससे यह दक्षिण कोरिया के इतिहास की सबसे भीषण जंगल की आग बन गई है।इसके अलावा, आग ने 90 से अधिक मकानों और अन्य इमारतों को नष्ट कर दिया है।इसके अलावा, 300 से अधिक संरचनाएं नष्ट हो गई हैं।
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संपत्ति और सांस्कृतिक धरोहरों को नुकसान
आग ने 200 से अधिक इमारतों को नष्ट कर दिया है, जिसमें 1,300 साल पुराना गौंसा बौद्ध मठ भी शामिल है। यह मठ 7वीं शताब्दी में निर्मित हुआ था और कोरिया की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा था। इसके अलावा, आग ने हजारों हेक्टेयर वन क्षेत्र को भी अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचा है।
बचाव और राहत कार्य
आग पर काबू पाने के लिए सरकार ने आपातकाल घोषित किया है और 1,600 से अधिक कर्मचारी, 35 हेलीकॉप्टर और कई दमकल गाड़ियों को तैनात किया है। तेज़ हवाओं और शुष्क मौसम के बावजूद, दमकलकर्मी और सैनिक आग बुझाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। साथ ही, प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और उन्हें आवश्यक सुविधाएं प्रदान करने के लिए भी कार्य किया जा रहा है।
पर्यावरणीय प्रभाव
आग के कारण लगभग 36,000 हेक्टेयर वुडलैंड जलकर खाक हो गया है, जिससे वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास नष्ट हो गए हैं। इससे कई प्रजातियों के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा होगा, लेकिन बिना आधिकारिक आंकड़ों के, सटीक संख्या बताना संभव नहीं है। इसके अलावा, वायु प्रदूषण में वृद्धि हुई है, जिससे स्थानीय निवासियों को सांस लेने में कठिनाई हो रही है और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं।
वन्यजीवों और पर्यावरण पर इस आग के प्रभाव को पूरी तरह से समझने के लिए और अधिक शोध और आधिकारिक रिपोर्टों की आवश्यकता है। आशा है कि संबंधित एजेंसियां जल्द ही इस संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान करेंगी।
इतिहास में इससे पहले की आग
- वर्ष 2000: दक्षिण कोरिया में एक भीषण जंगल की आग लगी थी, जिसने लगभग 23,000 हेक्टेयर जंगल को नष्ट कर दिया था। हालांकि, 2025 की आग इससे कहीं अधिक बड़ी और विनाशकारी साबित हुई है।
- वर्ष 2019: दक्षिण कोरिया के गंगवोन प्रांत में जंगल की आग लगी थी, जिसमें कई घर जलकर राख हो गए थे और सैकड़ों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाना पड़ा था।
- वर्ष 2022: सैमचोक क्षेत्र में आग लगने की एक घटना हुई थी, जिससे हजारों एकड़ वनस्पति जल गई थी।
सरकार की प्रतिक्रिया
दक्षिण कोरिया के कार्यवाहक राष्ट्रपति हान डक-सू ने इस आपदा को देश के इतिहास की सबसे भीषण आग बताया है और आग बुझाने के लिए सभी संसाधनों को जुटाने का आदेश दिया है। उन्होंने कहा, “नुकसान बढ़ता जा रहा है। ऐसी भीषण आग पहले कभी नहीं देखी गई। हम इस सप्ताह पूरी क्षमता के साथ आग को बुझाने की कोशिश करेंगे।”
भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के उपाय

- ड्रोन और सैटेलाइट तकनीक से जंगलों की निगरानी कर आग लगने से पहले ही उसे नियंत्रित किया जा सकता है।
- जंगलों के आसपास सुरक्षा बेल्ट बनाई जानी चाहिए ताकि आग के फैलने की संभावना कम हो।
- लोगों को जंगल में आग लगने के खतरों और उससे बचाव के तरीकों के बारे में जागरूक करना आवश्यक है।
- जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने के लिए ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करना आवश्यक है।
- सरकार और स्थानीय प्रशासन को बेहतर आपातकालीन योजनाएं तैयार करनी चाहिए ताकि ऐसी घटनाओं के दौरान कम से कम नुकसान हो।
निष्कर्ष
दक्षिण कोरिया में हाल ही में लगी इस जंगल की आग ने व्यापक स्तर पर विनाश किया है, जिससे मानव जीवन, संपत्ति, सांस्कृतिक धरोहरों और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचा है। इस आपदा ने एक बार फिर यह दर्शाया है कि प्राकृतिक आपदाओं के प्रति सतर्कता और त्वरित प्रतिक्रिया कितनी महत्वपूर्ण है। आशा है कि सरकार और संबंधित एजेंसियों के संयुक्त प्रयासों से इस आग पर शीघ्र ही काबू पाया जाएगा और प्रभावित लोगों को आवश्यक सहायता प्रदान की जाएगी।
